November 4, 2026

Gandhi Jayanti Special: How Mahatma Gandhi Helped End Jamshedpur’s Historic Workers’ Strike in 1925. गांधी के एक आह्वान से थम गया था जमशेदपुर का मजदूर आंदोलन, 1925 में बापू ने कराया था ऐतिहासिक समझौता

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सर्च न्यूज: सच के साथ: आज 2 अक्टूबर को पूरा देश महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। इस खास मौके पर जमशेदपुर के इतिहास से जुड़ा वर्ष 1925 का वह प्रसंग भी याद आता है, जब मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच गंभीर विवाद के बीच महात्मा गांधी जमशेदपुर पहुंचे थे। यह दौर औद्योगिक शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि बड़ी संख्या में मजदूर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे और कंपनी प्रबंधन के साथ गतिरोध बना हुआ था।

महात्मा गांधी 8 अगस्त 1925 को मजदूर नेता दीनबंधु सी.एफ. एंड्रयूज के निमंत्रण पर जमशेदपुर पहुंचे थे। उन्होंने विवाद को टकराव के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया। गांधी जी ने मजदूरों और कंपनी प्रबंधन, दोनों पक्षों से संवाद किया और उनके बीच समझौते का रास्ता तलाशने का प्रयास किया। उनकी मध्यस्थता के बाद मजदूरों की हड़ताल समाप्त हुई और औद्योगिक विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ा।

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण परिणाम मजदूर संगठन की मान्यता के रूप में सामने आया। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन ने जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन को मान्यता दी, जिसे आगे चलकर टाटा वर्कर्स यूनियन के रूप में जाना गया। गांधी जी ने उस दौर में बड़ी संख्या में मजदूरों को संबोधित करते हुए मालिक और मजदूर के संबंधों में सहयोग, जिम्मेदारी और ट्रस्टीशिप की भावना पर जोर दिया था।

करीब एक सदी बाद भी जमशेदपुर के इतिहास में 1925 का यह प्रसंग गांधी जी के सत्य, अहिंसा और संवाद के विचारों से जोड़ा जाता है। गांधी जयंती पर यह घटना इस बात की ऐतिहासिक मिसाल के तौर पर याद की जाती है कि औद्योगिक विवादों के बीच बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। लौहनगरी के इतिहास का यह अध्याय आज भी शहर की औद्योगिक विरासत से जुड़ी चर्चाओं में खास स्थान रखता है।