November 5, 2026

संताली भाषा की पढ़ाई को लेकर रघुवर दास की बड़ी मांग, NCERT की किताबें ओलचिकी लिपि में प्रकाशित करने का आग्रह

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सर्च न्यूज: सच के साथ: नई दिल्ली: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर संताली भाषा की पाठ्य-पुस्तकों और शैक्षणिक सामग्री को उसकी मूल ओलचिकी लिपि में तैयार एवं प्रकाशित करने की मांग की। इस संबंध में उन्होंने शिक्षा मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।

रघुवर दास ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय और उससे जुड़े संस्थानों द्वारा विभिन्न भाषाओं में पाठ्य-पुस्तकें, संदर्भ सामग्री और अन्य शैक्षणिक संसाधन तैयार किए जाते हैं। संताली भाषा की सामग्री को देवनागरी में तैयार किए जाने की चर्चा के बीच उन्होंने ओलचिकी को प्राथमिकता देने की मांग रखी।उन्होंने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि NCERT समेत शिक्षा मंत्रालय के अधीन संबंधित संस्थानों को निर्देश दिया जाए कि संताली भाषा की पाठ्य-पुस्तकें, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाएं और डिजिटल शैक्षणिक संसाधन ओलचिकी लिपि में तैयार किए जाएं।

रघुवर दास ने ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष 2025 का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ओलचिकी लिपि में संताली भाषा में अनूदित भारतीय संविधान का लोकार्पण किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है और ओलचिकी लिपि का इस्तेमाल झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और असम सहित कई राज्यों में होता है। नेपाल और बांग्लादेश में भी इसका प्रयोग होने का उन्होंने उल्लेख किया।

रघुवर दास के अनुसार, ओलचिकी में शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध होने से संताली विद्यार्थियों को अपनी मूल लिपि में पढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा और भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ इस मुद्दे पर बातचीत सकारात्मक रही।

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