November 5, 2026

चार करोड़ की लागत से बन रहा बॉक्स ब्रिज अब भी अधूरा, बड़ौदा घाट जाने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता

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दुर्गापूजा में परेशानी झेल चुके बागबेड़ा के लोग, अब छठ महापर्व पर व्रतियों की राह में अधूरा बॉक्स ब्रिज बनेगा चुनौती!

सर्च न्यूज | सच के साथ | जमशेदपुर।

बागबेड़ा-बड़ौदा घाट जाने वाली मुख्य सड़क पर सिद्धू-कान्हू मैदान के समीप नाले पर बन रहा बॉक्स ब्रिज स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण आम लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गापूजा के दौरान भी स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को इस समस्या से जूझना पड़ा। अब छठ महापर्व नजदीक आने के साथ ही एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ गई है।पथ निर्माण विभाग की ओर से करीब चार करोड़ रुपये की लागत से इस बॉक्स ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना को निर्धारित छह महीने की अवधि में पूरा किया जाना था, लेकिन तय समय-सीमा बीतने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है। लगातार बारिश को निर्माण में देरी का एक कारण बताया गया था। विभागीय स्तर पर शेष कार्य जल्द पूरा कराने का आश्वासन भी दिया गया था।

दुर्गापूजा में हुई परेशानी, अब छठ पर बढ़ेगी चुनौती: दुर्गापूजा के दौरान सड़क और निर्माण स्थल के कारण लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हुई। अब छठ महापर्व को देखते हुए स्थिति और संवेदनशील हो गई है। बड़ौदा घाट की ओर जाने वाले छठ व्रतियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की आवाजाही बढ़ेगी। ऐसे में यदि निर्माण कार्य और सड़क व्यवस्था समय रहते दुरुस्त नहीं हुई, तो व्रतियों को घाट तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

चार करोड़ की परियोजना, अभी भी कई काम बाकी: जानकारी के अनुसार, बॉक्स ब्रिज का निर्माण चाईबासा की राज यादव एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। एप्रोच रोड, मिट्टी कटिंग और गार्डवाल सहित कई महत्वपूर्ण कार्य शेष बताए गए थे। नया बॉक्स ब्रिज पुरानी पुलिया से लगभग आठ फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। इसके पूरा होने से जलजमाव की समस्या कम होने और आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है।**विभाग और निर्माण एजेंसी से लोगों की सीधी मांग**स्थानीय लोगों की मांग है कि पथ निर्माण विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी छठ महापर्व को देखते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाएं। साथ ही, जब तक पुल पूरी तरह तैयार नहीं होता, तब तक आवागमन के लिए सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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