अर्जुन मुंडा के काफिले की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
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रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के सुरक्षा काफिले में शामिल एक वाहन NH-33 पर चौका थाना क्षेत्र के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना उस समय हुई, जब अर्जुन मुंडा खूंटी से जमशेदपुर की ओर जा रहे थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हादसे में अर्जुन मुंडा और उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों को चोट नहीं आई।
बार-बार शिकायत के बावजूद सुधार क्यों नहीं?
अर्जुन मुंडा का आरोप है कि सुरक्षा काफिले में शामिल कुछ वाहन जर्जर स्थिति में हैं। सामान्य मरम्मत के बाद उन्हें दोबारा ड्यूटी में लगा दिया जाता है, जबकि कुछ समय बाद उनमें फिर तकनीकी खराबियां सामने आने लगती हैं।
उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई 2024 से 29 जून 2026 के बीच छह पत्र भेजे गए थे। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने का उन्होंने आरोप लगाया है।
सुरक्षा जवानों की जान भी उतनी ही महत्वपूर्ण
अर्जुन मुंडा ने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर जाएगा? उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि इसमें तैनात जवानों और वाहन चालकों के जीवन की रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी है।
सरकार से क्या है मांग?
अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार से पूरे मामले का संज्ञान लेने, सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की तकनीकी जांच कराने तथा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुरक्षित और दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने वाहनों की नियमित समीक्षा और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इस मामले में गंभीरता से जांच कराएगी और सुरक्षा वाहनों की फिटनेस सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएगी?
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